छठे दिन की कार्यशाला में मीडिया अध्ययन पर सारगर्भित और प्रेरक सत्र…….
विषयक एक सप्ताहिक कार्यशाला के छठे दिन भी प्रतिभागियों को ज्ञानवर्धक एवं विचारोत्तेजक व्याख्यानों से रूबरू होने का अवसर मिला।
आज के सत्र में डॉ. भावना भारद्वाज ने Advertisements as a Cultural Text विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विज्ञापन केवल व्यावसायिक साधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पाठ हैं जो समाज के मूल्यों, आकांक्षाओं और पहचान को प्रतिबिंबित व प्रभावित करते हैं। विज्ञापनों के माध्यम से उपभोक्तावाद, लैंगिक मान्यताएँ, वर्ग-भेद, आधुनिकता जैसी विचारधाराएँ सहज रूप में समाज तक पहुँचती हैं।
डॉ. श्रुति शर्मा ने (Mis)information in and through Media विषय पर अपने प्रबोधनपूर्ण विचार रखे। उन्होंने बताया कि आज का मीडिया इकोसिस्टम जानकारी, चयनित फ्रेमिंग, राजनीतिक दबाव, एल्गोरिथम और झूठी सूचनाओं के जटिल मिश्रण से संचालित होता है। उन्होंने गलत सूचना और दुष्प्रचार के समाज, लोकतंत्र और सार्वजनिक निर्णय-प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
इसके बाद डॉ. संजय पाठानिया ने Impact of Media on Universal Values विषय पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया समानता, न्याय, स्वतंत्रता, सहानुभूति और मानव गरिमा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सकारात्मक मीडिया सामग्री इन मूल्यों को मजबूत करती है, जबकि सनसनीखेज़ और पक्षपाती प्रस्तुति इन्हें कमजोर भी कर सकती है।
कार्यशाला का छठा दिन सहभागियों के लिए मीडिया और समाज के बहुआयामी संबंधों को समझने का एक समृद्ध अनुभव साबित हुआ।