दिनांक:18/11/2025
कांगड़ा की संस्कृति, कला और पहचान झमाकड़ा की गूँज ने महोत्सव में रचा नया इतिहास ।
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला का शानदार प्रदर्शन: ऊना में आयोजित HPU युवा महोत्सव (ग्रुप-3) में तृतीय स्थान, कांगड़ी झमाकड़ा ने दिल जीता
डिग्री कॉलेज धर्मशाला ने 12 से 15 नवंबर तक राजकीय महाविद्यालय ऊना में आयोजित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय युवा महोत्सव (ग्रुप-3) में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर के 44 महाविद्यालयों ने भाग लिया, जिसमें डिग्री कॉलेज धर्मशाला की टीम ने अपनी रचनात्मकता, कला कौशल और मजबूत सांस्कृतिक पहचान के दम पर उत्कृष्ट स्थान हासिल किया।
इस वर्ष महोत्सव की सबसे खास बात यह रही कि कांगड़ा की सुप्रसिद्ध लोक सांस्कृतिक धरोहर ‘कांगड़ी झमाकड़ा’ की प्रस्तुति ने निर्णायकों और दर्शकों दोनों को गहराई से प्रभावित किया। लंबे अंतराल के बाद कांगड़ी झमाकड़ा का मंच पर इतना सशक्त और पारंपरिक स्वरूप में प्रस्तुत होना अपने आप में उल्लेखनीय रहा। यह प्रस्तुति न केवल कला का प्रदर्शन थी, बल्कि कांगड़ा की लोक-संस्कृति, विरासत और पहचान का जीवंत प्रतिबिंब भी थी। इसने टीम को तृतीय स्थान दिलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। झमाकड़ा की लय, ताल, समूह समन्वय और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा भा सभी ने दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ी।
कॉलेज लौटने पर प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया ने टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया और इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह परिणाम विद्यार्थियों की मेहनत, समर्पण और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा की लोक-संस्कृति को मंच पर इस स्तर पर प्रस्तुत करना स्वयं में गर्व का विषय है।
प्रतिनिधि शिक्षिकाएँ प्रो. शेफाली और प्रो. सुमिता के नेतृत्व में टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। कॉलेज पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया और उनकी उपलब्धि की सराहना की गई।
कार्यक्रम के समन्वय में डॉ. मोनिका शर्मा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। एचपीयू युवा महोत्सव (ग्रुप-3) की कन्वीनर के रूप में उन्होंने आयोजन, अभ्यास और प्रस्तुति से जुड़े सभी कार्यों को प्रभावी ढंग से संभाला। प्रशिक्षक दल डॉ. सोनम, डॉ. मोनिका मक्कड़, डॉ अंजलि शर्मा, डॉ पूजा दीवान, डॉ. हर्ष दीपिका दत्ता, डॉ. नीरज कौशल, डॉ. दीपिका ठाकुर, डॉ. पल्लवी शर्मा, डॉ. सुमन, डॉ. बिट्टू कुमारी, डॉ. स्वर्णलता शर्मा, डॉ. अमित कटोच, प्रशिक्षक कनिका सूद एवं विद्यार्थियों का योगदान भी अत्यंत सराहनीय रहा। कॉलेज प्रचार्य प्रो राकेश पठानिया ने बताया झमाकड़ा जैसी सांस्कृतिक पहचान को इतने लंबे समय बाद बड़े मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना न केवल विद्यार्थियों के लिए गौरव का क्षण था, बल्कि कांगड़ा की परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला की यह जीत संस्थान की सांस्कृतिक विरासत, प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रणाली का परिचायक है। यह उपलब्धि विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ कांगड़ा की समृद्ध लोक-संस्कृति को नए आयाम भी प्रदान करती है।
