दिनांक :11/08/2026
सूक्ति लेखन से विद्यार्थियों ने दिया नैतिक मूल्यों और जीवन-दृष्टि का संदेश
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के संस्कृत विभाग ने आयोजित की सूक्ति लेखन प्रतियोगिता
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के संस्कृत विभाग द्वारा विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि, सृजनात्मकता एवं लेखन कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सूक्ति लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान-परंपरा, नैतिक मूल्यों एवं जीवन-दृष्टि से परिचित करवाने का प्रयास किया गया।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न प्रेरणादायक एवं जीवनोपयोगी सूक्तियों का लेखन किया। विद्यार्थियों ने सूक्तियों के अर्थ को स्पष्ट करते हुए उनके व्यावहारिक जीवन में महत्व को भी प्रस्तुत किया। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने सूक्तियों में निहित नैतिक एवं जीवन-मूल्यों को समझने और उन्हें अपने जीवन से जोड़ने का प्रयास किया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति, लेखन क्षमता एवं भाषायी कौशल को प्रोत्साहन मिला। साथ ही, भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान-परंपरा में निहित नैतिक मूल्यों के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता एवं रुचि विकसित हुई।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. शैली पारुल एवं डॉ. स्वर्ण लता शर्मा ने निर्णायक की भूमिका निभाते हुए विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। प्रतियोगिता में रिधिमा शर्मा ने प्रथम, आकांक्षा ने द्वितीय तथा काजल एवं रूपाली ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया ने संस्कृत विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भाषा एवं साहित्य आधारित रचनात्मक गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति, दर्शन एवं नैतिक मूल्यों का समृद्ध स्रोत है। ऐसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को समझने का अवसर मिलता है।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सूक्तियों में संक्षिप्त शब्दों में जीवन के गहरे अनुभव और महत्वपूर्ण संदेश निहित होते हैं, जिन्हें आत्मसात कर विद्यार्थी अपने व्यक्तित्व एवं जीवन-दृष्टि को बेहतर दिशा दे सकते हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए भविष्य में भी ऐसी रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
संस्कृत विभागाध्यक्षा ने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियाँ विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा एवं साहित्य से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सृजनात्मक अभिव्यक्ति, भाषायी कौशल, नैतिक चेतना तथा भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि सूक्तियाँ भारतीय ज्ञान-परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें जीवन को सार्थक एवं सकारात्मक दिशा देने वाले विचार निहित हैं।
प्रतियोगिता के अंत में विभाग की ओर से सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया गया तथा विजेता विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए बधाई दी गई।
