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 दिनाक: 07/10/2026

हमारी रसोई—आयुर्वेदिक औषधियों का खजाना’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित

7 अक्टूबर 2026 को राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के संस्कृत विभाग द्वारा प्राचार्य डॉ. राकेश पठानिया के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आयुर्वेद के व्यावहारिक पक्ष से परिचित करवाने के उद्देश्य से बुधवार को “हमारी रसोई—आयुर्वेदिक औषधियों का खजाना” विषय पर विशेष ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्कारम् विश्वविद्यालय, झज्जर (हरियाणा) के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण एवं उपकुलसचिव प्रो. (डॉ.) सुभाष चंद्र गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

अपने व्याख्यान में प्रो. (डॉ.) सुभाष चंद्र गुप्ता ने कहा कि भारतीय परंपरा में रसोई केवल भोजन तैयार करने का स्थान नहीं, बल्कि स्वास्थ्य एवं आरोग्य की प्रथम पाठशाला रही है। हमारी दैनिक रसोई में प्रयोग होने वाली अनेक वस्तुओं में औषधीय गुण विद्यमान हैं। हल्दी, अदरक, लहसुन, जीरा, धनिया, सौंफ, अजवाइन, दालचीनी, लौंग तथा विभिन्न मसालों के पारंपरिक उपयोग के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय आहार परंपरा एवं आयुर्वेद के बीच के गहरे संबंध से अवगत करवाया।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में “आहार” को स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। हमारी प्राचीन जीवनशैली में भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवनशक्ति के संतुलन को ध्यान में रखकर ग्रहण किया जाता था। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी पारंपरिक जीवनशैली एवं स्थानीय खाद्य परंपराओं के वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक पक्ष को समझें तथा स्वस्थ जीवन के लिए प्राकृतिक एवं संतुलित आहार को प्राथमिकता दें।

इस अवसर पर संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ. स्वर्ण लता शर्मा ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत साहित्य, आयुर्वेद और जीवन-पद्धति का गहरा अंतर्संबंध रहा है। इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध भारतीय परंपरा को आधुनिक संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने व्याख्यान में विशेष रुचि दिखाई तथा रसोई में प्रयुक्त विभिन्न खाद्य पदार्थों एवं मसालों के औषधीय महत्व से संबंधित जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम के अंत में संस्कृत विभाग की ओर से मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) सुभाष चंद्र गुप्ता का ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि हमारी पारंपरिक रसोई केवल स्वाद का केंद्र नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण आधार भी है। इस उपलक्ष्य पर अंग्रेजी विभाग की प्रो. डॉ. शैली पारूल तथा उनके विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।