दिनांक:04/12/2025
भारतीय परंपरा में योग का महत्व विषय पर गोष्ठी सम्पन्न, विशेषज्ञों ने योग को जीवनोपयोगी बताया ।
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में पंचनद शोध संस्थान, अध्ययन केंद्र कांगड़ा द्वारा “भारतीय परंपरा में योग का महत्व विषय पर एक प्रेरणादायी गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य प्रस्तोता के रूप में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के योग अध्ययन केंद्र के सहायक आचार्य डॉ. विकास नड्डा ने योग के विभिन्न आयामों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।
डॉ. नड्डा ने उपस्थित विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को योग की कई महत्वपूर्ण मुद्राओं का अभ्यास करवाते हुए बताया कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मिक, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि निरंतर योगाभ्यास व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा, रचनात्मक सोच और आशावादी दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिससे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कांगड़ा अध्ययन केंद्र के संयोजक डॉ. संजय पठानिया ने पंचनद शोध संस्थान की कार्यप्रणाली और उद्देश्यों का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि यह संस्थान राष्ट्रहित के विषयों पर अध्ययन, शोध और वैचारिक संवाद के लिए समर्पित बुद्धिजीवियों का संगठित मंच है, जिसमें शोधकर्ता, प्रोफेसर, साहित्यकार, पत्रकार, न्यायविद, कवि और कई प्रख्यात शिक्षा–विशेषज्ञ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
डॉ. पठानिया ने कांगड़ा क्षेत्र के बुद्धिजीवियों से अपील की कि वे पंचनद शोध संस्थान से जुड़कर राष्ट्र निर्माण की वैचारिक प्रक्रिया में अपना सहयोग दें, ताकि समाज और शासन दोनों के लिए उपयोगी नीतियों के निर्माण में सार्थक योगदान दिया जा सके।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के समन्वयक डॉ. उदय भान सिंह ने भी संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान के अध्यक्ष और विख्यात मीडिया चिंतक प्रो. बृज किशोर कुठियाला के मार्गदर्शन में विभिन्न अध्ययन केंद्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर निरंतर चर्चा परिचर्चा आयोजित करते हैं।
उन्होंने यह भी सूचित किया कि आगामी 7 दिसंबर को चंडीगढ़ स्थित निटर सेक्टर 26 में वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में एकात्म मानव दर्शन विषय पर वार्षिक व्याख्यान आयोजित होगा, जिसमें दीनदयाल उपाध्याय वैचारिकी के विशेषज्ञ डॉ. महेश चंद्र शर्मा मुख्य वक्ता होंगे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि योग और भारतीय दर्शन के प्रति नई पीढ़ी में गहरी रुचि बढ़ रही है। योग का संदेश स्पष्ट है जो स्वयं को साध लेता है, वह संसार को सहजता से साध लेता है। पंचनद शोध संस्थान द्वारा आयोजित यह गोष्ठी न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्रहित के प्रति सजगता बढ़ाने का प्रेरक माध्यम भी बनी।
