दिनांक:25/11/2025
राजकीय महाविधालय धर्मशाला के मनोविज्ञान विभाग द्वारा एक दिवसीय प्रेरणादायी संगोष्ठी का सफल आयोजन ।
राजकीय महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें दो प्रतिष्ठित विद्वानों डॉ. एस. एन. घोष, विभाग मानोविज्ञान, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय तथा डॉ. कुलविंदर सिंह ने बतौर संसाधन व्यक्ति भाग लिया। कार्यक्रम में विभाग की प्राध्यापिकाएँ डॉ. मोनिका मक्कर और प्रो. पूजा दीवान सहित मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मोनिका मक्कर द्वारा अतिथि विद्वानों के हार्दिक स्वागत से हुई। उन्होंने विशेषज्ञों की उपस्थिति को छात्रों के शैक्षणिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके उपरांत विभागीय गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें वर्तमान शैक्षणिक सत्र के दौरान विभाग द्वारा किए गए विविध कार्यक्रमों, उपलब्धियों और शैक्षणिक पहलों का विस्तृत विवरण साझा किया गया।
इसके बाद डॉ. एस. एन. घोष ने मानव विकास की मनोवैज्ञानिक आयामों पर एक प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक संवाद सत्र लिया। उन्होंने मानव उत्क्रांति को समझने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की, जैसे मानव विकास को आकार देने में मनोवैज्ञानिक कारकों की भूमिका, आधुनिक समाज में सामुदायिक जुड़ाव और सामाजिक एकजुटता का बढ़ता महत्व, Survival of the Fittest” की अवधारणा में आया परिवर्तन जहाँ शारीरिक क्षमता से अधिक सामाजिक बुद्धिमत्ता, सहयोग और अनुकूलनशीलता की अहमियत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा मानव जाति के समक्ष उभरती चुनौतियाँ, नैतिक चेतना, चिंतनशील निर्णय-क्षमता और उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवहार को विकसित करने की आवश्यकता, ताकि मानव प्रजाति विकास की दौड़ में सक्षम बनी रहे।
इसके उपरांत डॉ. कुलविंदर सिंह ने अनुसंधान पद्धति पर अत्यंत सरल, स्पष्ट और उपयोगी व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर प्रकाश डाला मनोविज्ञान में अनुसंधान की मूल संरचना, स्वतंत्र एवं आश्रित चर की भूमिका सांख्यिकीय अवधारणाओं की शोध-व्याख्या में महत्ता, अनुसंधान करते समय स्पष्टता, सटीकता और नैतिकता का महत्व, संगोष्ठी का समापन छात्रों और विशेषज्ञों के बीच हुए संवाद सत्र से हुआ, जिसमें छात्रों ने अपने प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से मूल्यवान मार्गदर्शन प्राप्त किया। यह एक दिवसीय संगोष्ठी छात्रों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी सिद्ध हुई। दोनों वक्ताओं द्वारा साझा किए गए विचारों ने विद्यार्थियों की न केवल वैचारिक समझ को गहरा किया, बल्कि उन्हें मनोविज्ञान विषय को शोधपरक दृष्टि से समझने और अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
