दिनांक 14/10/2026
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के रोवर्स ने रिवालसर में निभाई सेवा की मिसाल, बेसिक ट्रेनिंग कोर्स में स्टाफ एवं सर्विस टीम के रूप में दिया योगदान
अपूर्व कक्कड़ और शिवांश अवस्थी ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में संभाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां, अनुशासन, नेतृत्व और सेवा भावना के साथ बढ़ाया महाविद्यालय का गौरव
युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और निस्वार्थ सेवा भावना विकसित करने में स्काउटिंग एवं गाइडिंग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के दो रोवर्स अपूर्व कक्कड़ और शिवांश अवस्थी ने रिवालसर स्थित स्टेट ट्रेनिंग सेंटर (एसटीसी) में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में अपनी सेवाओं और जिम्मेदारियों का प्रभावशाली निर्वहन किया।
‘द भारत स्काउट्स एंड गाइड्स’ जिला कांगड़ा के अंतर्गत महाविद्यालय के दोनों रोवर्स ने 8 से 12 अक्टूबर तक आयोजित ‘बेसिक कोर्स फॉर स्काउट मास्टर्स एंड गाइड कैप्टन्स’ में स्टाफ एवं सर्विस टीम के सदस्यों के रूप में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण शिविर के सफल संचालन में सहयोग देने के साथ विभिन्न गतिविधियों के सुचारू आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सहभागिता युवाओं में विकसित हो रही सेवा, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना का प्रेरणादायक उदाहरण रही।
पांच दिवसीय शिविर से लौटने के बाद दोनों रोवर्स ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि शिविर के दौरान उन्हें प्रशिक्षण गतिविधियों के संचालन, सामूहिक कार्यप्रणाली और सेवा संबंधी जिम्मेदारियों को नजदीक से समझने का अवसर मिला। इस अनुभव ने उनकी कार्यक्षमता, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व कौशल को और अधिक सुदृढ़ किया। शिविर में रोवर लीडर डॉ. अजय कुमार का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग भी सराहनीय रहा।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया ने दोनों रोवर्स अपूर्व कक्कड़ और शिवांश अवस्थी को इस उपलब्धि एवं सेवा योगदान के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि स्काउटिंग एवं गाइडिंग केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने का सशक्त माध्यम है। यह विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व, आपसी सहयोग, आत्मनिर्भरता और समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा का भाव विकसित करती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की ऐसी सक्रिय सहभागिता महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। युवा पीढ़ी जब अपनी शिक्षा के साथ समाज और संस्थानों के प्रति जिम्मेदारी निभाना सीखती है, तभी उसके व्यक्तित्व का वास्तविक विकास होता है।
दोनों रोवर्स की यह सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि युवा केवल अवसरों की तलाश करने वाले नहीं, बल्कि अपनी सेवाओं, समर्पण और सकारात्मक योगदान से दूसरों के लिए प्रेरणा बनने की क्षमता भी रखते हैं।
