दिनाँक: 27/08/2026
वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया जी के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में पौधरोपण अभियान आयोजित किया गया।
इस अवसर पर विभाग संस्कृत दिवस समारोह में गूंजा संस्कृत भाषा का गौरव, विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के संस्कृत विभाग द्वारा प्राचार्य डॉ. राकेश पठानिया के मार्गदर्शन में संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत संस्कृत दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में संस्कृत भाषा, साहित्य एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा की समृद्ध विरासत को विविध सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उजागर किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने वैदिक मंगलाचरण तथा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके उपरांत अंकिता ने ‘संस्कृत दिवस मनाने का उद्देश्य एवं संस्कृत भाषा के संरक्षण की आवश्यकता’ विषय पर विचार प्रस्तुत करते हुए संस्कृत की प्रासंगिकता, वैज्ञानिकता तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान कंगना ने मनमोहक शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। अंशू, अंकिता, गुड़िया, अमृता एवं वैष्णवी द्वारा प्रस्तुत मधुर संस्कृत गीतिका ने वातावरण को संस्कृतमय बना दिया। सचिन कुमार ने महाकवि कालिदास रचित महाकाव्य ‘रघुवंशम्’ के प्रथम सर्ग का सस्वर वाचन किया, जिसे उपस्थितजनों ने खूब सराहा। वहीं अंकिता ने ‘अधरं मधुरं’ गीत पर शास्त्रीय नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी। प्रथम वर्ष की छात्राओं ने भगवान श्रीकृष्ण के स्तोत्र पर मनमोहक शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
समारोह में भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा, साहित्य एवं संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रभावशाली ढंग से अपने विचार रखे। प्रतियोगिता में अंकिता ने प्रथम, रिधिमा शर्मा ने द्वितीय तथा अतुल शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने हिमाचली लोकनृत्य नाटी प्रस्तुत कर लोक-संस्कृति की मनमोहक झलक पेश की।
संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित श्लोक लेखन, सूक्ति लेखन एवं संस्कृत साहित्य प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही कार्यक्रम में संस्कृत वस्तु प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें विद्यार्थियों ने दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले सामान्य संस्कृत शब्दों से सभी को परिचित करवाया। प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों की सृजनात्मकता एवं संस्कृत भाषा के प्रति उनकी रुचि को प्रदर्शित किया।
समारोह के मुख्य अतिथि भौतिक विज्ञान विभाग के डॉ. विक्रम श्रीवत्स ने संस्कृत भाषा के महत्व एवं इसकी समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एवं ज्ञान-परंपरा की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन का दायित्व केवल संस्कृत विभाग या संस्कृत विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा संस्कृत का प्रयोग अपने जीवन में करने का आह्वान किया। उन्होंने संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं संस्कृत वस्तु प्रदर्शनी की सराहना करते हुए विभाग को संस्कृत दिवस के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
डॉ. शैली पारुल, डॉ. आरती चंदेल एवं डॉ. शिष्टा शर्मा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया तथा संस्कृत भाषा के अध्ययन एवं इसके प्रचार-प्रसार के लिए उन्हें प्रेरित किया। निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ. शैली पारुल एवं डॉ. शिष्टा शर्मा ने निभाई।
संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. स्वर्ण लता शर्मा ने अपने संबोधन में संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
समारोह में डॉ. हर्षा राणा, डॉ. स्वर्ण लता शर्मा, डॉ. शैली पारुल भडवाल, डॉ. शिष्टा शर्मा, डॉ. आरती चंदेल, प्रो. राधे श्याम, डॉ. अमित कटोच, तरसेम जरयाल सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में शांति मंत्र के सामूहिक पाठ के साथ संस्कृत दिवस समारोह का विधिवत एवं गरिमापूर्ण समापन हुआ।
प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया जी ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए अधिक से अधिक पौधरोपण अभियानों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पौधरोपण केवल प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित एवं स्वच्छ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में वनस्पति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजना खरवाल, डॉ. रणजीत ठाकुर, डॉ. सोनम सहित प्रयोगशाला सहायकों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं हरित परिसर के निर्माण का संदेश दिया गया।
