दिनांक: 10/11/2025
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में रील, रियल और रिप्रेजेंटेड : मीडिया एंड कल्चरल इमेजिनेशन” विषय पर एक सप्ताहिक कार्यशाला का शुभारम्भ ।
डिग्री कॉलेज धर्मशाला में ‘मीडिया और सार्वजनिक धारणा की समझ’ पर प्रेरक कार्यशाला
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं मीडिया लिटरेरी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में रील, रियल और रिप्रेजेंटेड : मीडिया एंड कल्चरल इमेजिनेशन विषय पर आधारित एक सप्ताहिक कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि मीडिया आज समाज का दर्पण बन चुका है। यदि विद्यार्थी सही दिशा में मीडिया की शक्ति का उपयोग करें, तो वे न केवल अपनी सोच को व्यापक बना सकते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन भी ला सकते हैं।
कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के सहायक आचार्य डॉ. चंदन आनंद ने मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने मीडिया और सार्वजनिक धारणा की समझ विषय पर बोलते हुए बताया कि आज के दौर में सूचना ही सबसे बड़ी शक्ति है, और जिस प्रकार हम मीडिया से प्राप्त सूचनाओं को ग्रहण करते हैं, वही हमारी सोच, दृष्टिकोण और निर्णयों को आकार देती है। उन्होंने विद्यार्थियों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि कैसे गलत सूचनाएँ और भ्रामक प्रचार हमारे समाज और राष्ट्र की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को मीडिया की भूमिका और उसके सामाजिक प्रभावों की बारीकियों से अवगत कराया तथा कहा कि मीडिया सिर्फ सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि यह सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण उपकरण है। हमें मीडिया को एक जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ समझना चाहिए। अहम यह है की डॉ. चंदन आनंद इसी महाविधालय के छात्र भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया की आज जो कुछ भी हैं गुरुओं के आशीर्वाद से हैं आज उन्हें अपने महाविधालय में आकर अनुभव महसूस हो रहा हैं। डॉ. आनंद ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे सोशल मीडिया का उपयोग सजगता, विवेक और सकारात्मक सोच के साथ करें। उन्होंने कहा कि मीडिया के युग में सच्चाई को पहचानना ही वास्तविक बुद्धिमत्ता है।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में तरसेम जरयाल ने Media as a Cultural Apparatus विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को बताया कि सोशल मीडिया एक शक्तिशाली साधन है। यदि हम इसे सही दिशा में प्रयोग करें, तो यह न केवल हमारे जुनून को पेशे में बदल सकता है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बन सकता है।
इसके बाद डॉ. संजीव कुमार ने Change in the Social Dynamics in Age of Social Media विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति हमारी पहचान है। सोशल मीडिया पर अपनी संस्कृति को अपनाना और प्रचारित करना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यही जागरूकता समाज में नई ऊर्जा का संचार करेगी। उप-प्राचार्य प्रो. संजय पठानिया ने आयोजन टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक हैं। इससे उनकी सोच, दृष्टिकोण और अभिव्यक्ति की क्षमता में निखार आता है।
कार्यशाला के संयोजक डॉ. विक्रम श्रीवत्स ने बताया कि मीडिया केवल सूचना का स्रोत नहीं, बल्कि समाज की सोच को दिशा देने वाला माध्यम है। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को मीडिया साक्षर बनाना और उनमें रचनात्मक व आलोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है।
प्रो अंजलि शर्मा और कार्यशाला के सह-संयोजक डॉ. शैली पारुल व डॉ आरती चंदेल ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और बौद्धिक जागरूकता बढ़ाने में सहायक होते हैं। मीडिया के ज़रिए वे अपनी अभिव्यक्ति को प्रभावशाली बना सकते हैं।
इस अवसर पर आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक (Chief Patron) प्रो. राकेश पठानिया, संयोजक (Convener) डॉ. विक्रम श्रीवत्स तथा आयोजन समिति के सदस्य प्रो. हर्षा राणा, डॉ. अंजलि शर्मा, प्रो. नरेश कुमार, डॉ. पर्वेश गिल, डॉ. भारत भूषण, डॉ. ऋतु बाला, डॉ. आशीष रंजन, डॉ. शेली पारुल, प्रो. राधे श्याम, प्रो. दीपिका ठाकुर डॉ बलराज, डॉ. आरती चंदेल, डॉ. अमित कटोच, डॉ. गौरव महाजन, डॉ. संजीव कुमार डॉ. श्रुति, डॉ. अजय कुमार तथा डॉ. संजय कुमार उपस्थित रहे। इन सभी ने मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह एवं रोज़ेट भेंट कर सम्मानित किया तथा कार्यशाला की सफलता की शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। उन्होंने वक्ताओं से संवाद कर न केवल विषय की गहराई को समझा, बल्कि मीडिया की भूमिका को एक नई दृष्टि से देखने की प्रेरणा भी प्राप्त की। IQAC टीम की ओर से भी यह संदेश दिया गया कि ऐसे शैक्षणिक आयोजन न केवल शिक्षार्थियों को नई दृष्टि देते हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।
